Special Story Post


कहानी उस युवा किसान की जिसने नौकरी छोड़ खेती में बनाया करियर

कहानी उस युवा किसान की जिसने नौकरी छोड़ खेती में बनाया करियर

यह कहानी है सलेमपुर के समीप गोविन्दपुरा गांव के हंसपाल मीना की। 26 वर्षीय युवा किसान हंसपाल अब पशुपालन डेयरी के साथ खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहा है। स्नातक करने के बाद उसने बैंक की नौकरी के लिए तीन बार प्रयास किया, लेकिन साक्षात्कार में सफल नहीं हो सका। इसके बाद जयपुर में लो फ्लोर रोडवेज बस में परिचालक की नौकरी की, लेकिन रास नहीं आई और महज एक सप्ताह में छोड़कर गांव लौट आया और परिजनों को खेती करने की इच्छा जताई।


मन में कृषक बन कुछ अलग करने की ठानी तो घर वालों का सहयोग नहीं मिला, जैसे-तैसे घर वालों को राजी भी किया तो फिर किस्मत ने साथ नहीं दिया और पहले ही प्रयास में लाखों का नुकसान झेलना पड़ गया, लेकिन उसने अपनी जिद के आगे हार नहीं मानी और शायद यही वजह रही कि अब वह एक सफल युवा किसान बनकर उभरा है।


पहले प्रयास में ताईवान रेडलेडी पपीता लगाया, लेकिन प्रकृति की पड़ी मार (ओलावृष्टि) ने करीब डेढ़ लाख रुपए के घाटा दे दिया। लेकिन वह हताश नहीं हुआ और करीब तीन वर्ष पहले रसभरी फल की खेती शुरू की तो अच्छा मुनाफा भी कमाया।


हंसपाल के अनुसार करीब तीन वर्ष पहले इंटरनेट पर ढूंढते-ढूंढते रसभरी की खेती रास आ गई। वर्ष 2015 में अपने खेत में से करीब 2 बीघा भूमि में रसभरी फल का बीज बो दिया, जो पहले ही वर्ष फायदे का सौदा साबित हुआ। दूसरे वर्ष दोनों भाईयों ने उसे बढ़ाते हुए तीन बीघा में बोया तो फिर अच्छी उपज और दाम मिले। इस वर्ष फिर फसल का रकबा बढ़ा दिया। वर्तमान में करीब चार बीघा भूमि में रसभरी फल की खेती लहलहा रही है।


इसी के साथ हंसपाल ने पशुपालन कर डेयरी खोली। करीब दो दर्जन होल्सटीन फ्रीसिएन नस्ल की गाय और चार भैंसों के साथ डेयरी का संचालन कर रहे हंसपाल के अनुसार वर्तमान में करीब डेढ़ क्विंटल दूध की वह आपूर्ति कर रहा है। हंसपाल के अनुसार वह गंगापुर स्थित दुग्ध डेयरी, विद्यालयों में दूध की आपूर्ति की जा रही है। अब हंसपाल की ग्रीनहाउस का सपना संजोकर उसमें नई तकनीक से फल-सब्जी की पैदावार करना है।