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|अब भारत में हींग की खेती करना हे संभव हैं, हींग की खेती करके किसान हो सकते हे मालामाल, एक किलो की क

|अब भारत में हींग की खेती करना हे संभव हैं, हींग की खेती करके किसान हो सकते हे मालामाल, एक किलो की कीमत हे 35000 Rs./-| 

भारत में हिंग की खेती की शुरुआत हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति से हुई है। ये इंडियन कॉफी बोर्ड के सदस्य डॉ.विक्रम शर्मा और हिमाचल सरकार के वजह से संभव हो पाया है। डॉ. शर्मा ने इसके बीज को इरान और तुर्की से मंगाकर यहां इसकी बीज तैयारल की है।इसके साथ ही पहांड़ी इलाकों में रह रहे किसानों के लिए अच्छी खबर यह है की वहां के किसान आसानी से हींग की खेती कर सकते हैं।

भारत देश में हींग की खपत लगभग 40 प्रतिशत है फिर भी भारत इसकी खेती नहीं होती और इसे दूसरे देश से आयात करना पड़ता है। लेकिन अब भारत में हिंग की खेती में सफलता दिखाई दे रही है।

हिंग एक सौंफ प्रजाति का पौधा है और इसकी लम्बाई 1 से 1.5 मीटर तक होती है।  ईरान, अफगानिस्तान, ब्लूचिस्तान और तुर्कमेनिस्तान में उसकी खेती प्रमुख तौर पर की जाती है । 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान हींग की खेती के लिए उपयुक्त होता है।

हींग की खेती के लिए न ज्यादा ठण्ड और न ही ज्यादा गर्मी की आवश्यक्ता होती है। इसलिए भारत में पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी खेती आसानी से की जा सकती है क्योकिं इन क्षेत्रों में ही ऐसा हवामान रहता हैं।

हींग की खेती ऐसी जगह की जाती है जहा सूरज की धूप सीधे उस जगह पर आये। जहा छाया हो वहा उसे उगाया नहीं जाता सबसे पहले हींग के बीज को ग्रीन हाऊस में  2-2 फीट की दूरी पर बोया जाता है। पौधे निकलने के बाद इसे फिर 5-5 फीट की दूरी पर लगा दिया जाता है।

हाथ लगाकर जमीन की नमी को देख कर ही इसमें पानी का छिड़काव किया जा सकता है, ज्यादा पानी का छिड़काव पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है। हींग पौधे को पेड़ बनने के लिए 5 वर्ष का समय लगता है। इसकी जड़ों व सीधे तनों से गौंद निकाला जाता है। एक किलो की कीमत हे 35000 Rs./-|