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गुजरात के कच्छ इलाके में इजरायल की बरही किस्म के छुआरा की पैदावार बढ़ रही है।

गुजरात के कच्छ इलाके में इजरायल की बरही किस्म के छुआरा की पैदावार बढ़ रही है। पिछले एक दशक के दौरान गुजरात में इस बागवानी फसल की खेती का रकबा बढ़कर 17,000 हैक्टेयर हो गई है। गुजरात इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर एस. के. सिंह ने बताया कि पिछले एक दशक में छुआरा की खेती का रकबा 9900 हैक्टेयर से बढ़कर 16,950 हैक्टेयर हो गया है।

विदेशी टिश्यू कल्चर प्लांट के बेहतर नतीजे मिले और पिछले दस साल में गुजरात में छुआरे का उत्पादन बढ़कर दोगुना हो गया। इस समय गुजरात में हर साल करीब 1.5 लाख टन छुआरे का उत्पादन होता है। मूंदड़ा तालुका में सबसे ज्यादा पैदावार होती है। यहां पूरे राज्य का 40 फीसदी उत्पादन हो रहा है।

इजरायल से छुआरे का पौधा आयात करने का खर्च करीब 3,000 रुपये आती है। सरकार किसानों कोस पर 1,250 रुपये प्रति पौधा सब्सिडी दे रही है। हर पौधे पर प्रत्येक सीजन में करीब 1,500 किलो छुआरे का उत्पादन होता है। अब पाटन और बनासकांठा जिलों में भी किसान प्रायोगिक तौर पर छुआरे की खेती कर रहे हैं। देश में गुजरात का कच्छ एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां छुआरे की खेती होती है।

पिछले तीन वर्षों में छुआरे की विदेशी किस्म खासी लोकप्रिय हो रही है। यह किस्म इस क्षेत्र के अनुकूल है। छुआरे का फल लगने का सीजन काफी छोटा होता है। वर्ष में दो माह जुलाई व अगस्त के दौरान फल लगते हैं। जीएआईसी के प्रमुख ने कहा कि किसान इजरायल से आयातित टिश्यू कल्चर प्लांट लगा रहे हैं क्योंकि यहां की जलवायु इस किस्म के लिए अनुकूल है।